आंगनवाड़ी वर्कर और सुपरवाइजर में अंतर
anganwadi worker aur supervisor mein difference sabse pehle ek baat se samajh aata hai: वर्कर एक आंगनवाड़ी केंद्र चलाती हैं, और सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) 20–25 केंद्रों की देखरेख करती हैं। anganwadi worker aur supervisor mein difference सिर्फ काम का नहीं है, बल्कि नौकरी की किस्म का भी है। वर्कर को मानदेय मिलता है, जबकि सुपरवाइजर एक नियमित सरकारी पद पर वेतनमान (pay scale) पाती हैं।
इस लेख में anganwadi worker aur supervisor mein difference को पहले तुलना तालिका में, फिर आसान भाषा में समझाया गया है — योग्यता, भर्ती, काम, वेतन सार और पदोन्नति। उत्तर प्रदेश पर खास ध्यान है, पर अंतिम फैसला हमेशा अपने जिले या राज्य के ताज़ा नोटिफिकेशन को देखकर ही लें, क्योंकि हर राज्य के नियम थोड़े अलग हो सकते हैं।

एक नज़र में: इस लेख की जानकारी
| जानकारी | विवरण |
| विषय | आंगनवाड़ी वर्कर और सुपरवाइजर में अंतर |
| मुख्य फर्क | वर्कर: एक केंद्र, मानदेय; सुपरवाइजर: 20–25 केंद्र, नियमित वेतनमान |
| वर्कर की UP योग्यता (2026 जिला भर्तियाँ) | इंटरमीडिएट (12वीं), केवल महिला, उसी ग्राम सभा या वार्ड की निवासी |
| सुपरवाइजर की UP योग्यता (UPSSSC मुख्य सेविका 05/2022 उदाहरण) | UPSSSC PET + स्नातक, जिसमें समाजशास्त्र, समाज कार्य, गृह विज्ञान या पोषण एवं बाल विकास विषय हो |
| वर्कर का चयन | मेरिट सूची, आमतौर पर कोई लिखित परीक्षा नहीं |
| सुपरवाइजर का चयन | लिखित परीक्षा और दस्तावेज़ सत्यापन |
| वेतन का सार | वर्कर: मानदेय; सुपरवाइजर: वेतनमान + DA, HRA, TA जैसे भत्ते |
| आगे का रास्ता | वर्कर → सुपरवाइजर (विभागीय परीक्षा/अनुभव कोटा, राज्य के नियम से) → CDPO |
| सबसे ज़रूरी सलाह | आवेदन से पहले अपने राज्य या जिले का ताज़ा आधिकारिक नोटिफिकेशन ज़रूर पढ़ें |
तुलना तालिका: anganwadi worker aur supervisor mein difference एक नज़र में
यही तालिका इस लेख की रीढ़ है। इसे पढ़कर anganwadi worker aur supervisor mein difference एक ही जगह समझ आ जाएगा, और आगे के हिस्सों में हर पंक्ति की पूरी कहानी मिलेगी।
| तुलना का बिंदु | आंगनवाड़ी वर्कर (कार्यकर्ता) | आंगनवाड़ी सुपरवाइजर (मुख्य सेविका) |
| पद और स्तर | एक आंगनवाड़ी केंद्र की प्रभारी, ज़मीनी स्तर की कार्यकर्ता | एक सेक्टर या क्षेत्र की पर्यवेक्षक, वर्कर से एक स्तर ऊपर |
| नौकरी की स्थिति | मानदेय आधारित (honorary) कार्यकर्ता, नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं | नियमित सरकारी कर्मचारी, वेतनमान वाला पद |
| कितने केंद्र | एक आंगनवाड़ी केंद्र | आमतौर पर 20–25 आंगनवाड़ी केंद्र |
| योग्यता (सामान्य) | 10वीं या 12वीं पास (UP की 2026 जिला भर्तियों में इंटरमीडिएट) | स्नातक (graduation); UPSSSC मुख्य सेविका 2022 में विषय-विशेष स्नातक |
| निवास की शर्त | उसी ग्राम सभा या वार्ड की निवासी होना ज़रूरी (UP में) | राज्य या जिले का निवासी होना, पर वर्कर जैसी ग्राम-सभा-विशेष शर्त आमतौर पर नहीं |
| भर्ती प्रक्रिया | मेरिट सूची + दस्तावेज़ सत्यापन, आमतौर पर कोई लिखित परीक्षा नहीं | लिखित परीक्षा + दस्तावेज़ सत्यापन; UP में UPSSSC के ज़रिए |
| वेतन/मानदेय (सार) | मासिक मानदेय; UP में सितंबर 2026 से बढ़कर ₹12,000 (पूरी जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक देखें) | वेतनमान + भत्ते; UP से जुड़ी रिपोर्टों में भत्तों सहित लगभग ₹35,000–₹45,000 प्रतिमाह बताया गया है (पूरी जानकारी के लिए नीचे दिए लिंक देखें) |
| भत्ते और लाभ | DA और HRA जैसे नियमित भत्ते आमतौर पर नहीं; राज्य की योजनाओं से जुड़े सीमित लाभ | DA, HRA, TA, अवकाश और सेवा नियमों के अनुसार पेंशन जैसे लाभ |
| मुख्य काम | केंद्र चलाना, पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य रिकॉर्ड | केंद्रों का निरीक्षण, वर्करों का मार्गदर्शन, रिपोर्ट और प्रशिक्षण |
| रिपोर्ट किसको | सुपरवाइजर और CDPO को | CDPO और जिला प्रशासन को |
| आगे बढ़ने का रास्ता | अनुभव और योग्यता के साथ सुपरवाइजर परीक्षा का रास्ता | CDPO और फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) की ओर बढ़ने का रास्ता |
अब anganwadi worker aur supervisor mein difference की हर पंक्ति को अलग-अलग समझते हैं, ताकि कोई भ्रम न रह जाए।
पद और काम का दायरा: एक केंद्र बनाम 20–25 केंद्र
आंगनवाड़ी anganwadi worker aur supervisor mein difference की शुरुआत यहीं से होती है — वर्कर अपने केंद्र की धुरी होती हैं। वे बच्चों को प्री-स्कूल शिक्षा देती हैं, पूरक पोषण (supplementary nutrition) बाँटती हैं, बच्चों का वज़न और बढ़त दर्ज करती हैं, और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी देती हैं। केंद्र खुलना, बच्चों की हाज़िरी, रजिस्टर और रिकॉर्ड — ये सब वर्कर की रोज़ की ज़िम्मेदारी है।
anganwadi worker aur supervisor mein difference यहाँ साफ है — सुपरवाइजर का काम इससे बिल्कुल अलग स्तर का है। वे खुद एक केंद्र नहीं चलातीं, बल्कि अपने क्षेत्र के 20–25 केंद्रों पर नज़र रखती हैं। वे केंद्रों का दौरा करती हैं, यह देखती हैं कि वर्कर और सहायिका मौजूद हैं या नहीं, पोषण सही तरीके से मिल रहा है या नहीं, और रिकॉर्ड ठीक से रखे जा रहे हैं या नहीं। जहाँ कमी दिखती है, वहाँ वे वर्कर को समझाती हैं, प्रशिक्षण देती हैं और समस्या को CDPO तक पहुँचाती हैं।
नौकरी की स्थिति: मानदेय बनाम नियमित सरकारी नौकरी
anganwadi worker aur supervisor mein difference का यह पहलू सबसे ज़्यादा मायने रखता है, क्योंकि यहीं से वेतन और सुरक्षा का फर्क शुरू होता है।
यही वह बिंदु है जहाँ सबसे ज़्यादा गलतफहमी होती है। आंगनवाड़ी वर्कर और सहायिका को मानदेय (honorarium) मिलता है। इसका मतलब है कि वे सरकार की योजना से जुड़ी कार्यकर्ता हैं, पर उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी वाला वेतनमान नहीं मिलता। इसी वजह से उनके मामले में DA, HRA और पेंशन जैसे नियमित सरकारी लाभ उसी तरह लागू नहीं होते, जैसे किसी वेतनमान वाले पद पर होते हैं।
anganwadi worker aur supervisor mein difference में सुपरवाइजर इसके उलट, एक नियमित सरकारी पद है। उन्हें वेतनमान मिलता है, जिसमें DA, HRA और TA जैसे भत्ते जुड़ते हैं, और सेवा नियमों के अनुसार अवकाश तथा सेवानिवृत्ति लाभ भी मिलते हैं। कई लेखों में सुपरवाइजर को ग्रुप C का पद बताया गया है, और UPSSSC मुख्य सेविका के पुराने नोटिफिकेशन में वेतनमान और ग्रेड पे का साफ उल्लेख मिलता है।
योग्यता: कौन किस पद के लिए आवेदन कर सकता है
anganwadi worker aur supervisor mein difference को योग्यता के लिहाज़ से देखें, तो वर्कर के लिए 12वीं और सुपरवाइजर के लिए स्नातक की माँग ही पहला बड़ा फर्क है।
anganwadi worker aur supervisor mein difference में वर्कर के लिए योग्यता राज्य के अनुसार बदलती है, पर सामान्य तस्वीर साफ है। कई राज्यों में 10वीं या 12वीं पास महिला वर्कर बन सकती है। उत्तर प्रदेश की 2026 की जिला भर्तियों में इंटरमीडिएट (12वीं) पास होना ज़रूरी बताया गया है। साथ ही, UP में आवेदिका को उसी ग्राम सभा (ग्रामीण क्षेत्र में) या उसी वार्ड (शहरी क्षेत्र में) की स्थायी निवासी होना होता है, जहाँ रिक्ति निकली है। यह शर्त बहुत सख्त है — दूसरे गाँव या वार्ड की महिला उस रिक्ति के लिए पात्र नहीं मानी जाती।
सुपरवाइजर के लिए योग्यता एक कदम ऊपर है। सामान्य रूप से स्नातक (graduation) माँगा जाता है, और कुछ राज्यों में गृह विज्ञान, समाज कार्य, समाजशास्त्र, पोषण या बाल विकास जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाती है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण इसे और साफ करता है। UPSSSC मुख्य सेविका भर्ती 05/2022 में आवेदक को UPSSSC PET 2021 में शामिल होना था और कला स्नातक में समाजशास्त्र, समाज कार्य, गृह विज्ञान या पोषण एवं बाल विकास में से कोई एक विषय होना था। आयु सीमा उस भर्ती में 1 जुलाई 2022 को 21 से 40 वर्ष रखी गई थी।
भर्ती प्रक्रिया: मेरिट सूची बनाम लिखित परीक्षा
anganwadi worker aur supervisor mein difference भर्ती में भी साफ दिखता है — एक तरफ मेरिट सूची है, दूसरी तरफ लिखित परीक्षा।
anganwadi worker aur supervisor mein difference में वर्कर की भर्ती आमतौर पर बिना लिखित परीक्षा के होती है। UP की जिला भर्तियों में चयन पूरी तरह शैक्षणिक मेरिट के आधार पर होता है — यानी इंटरमीडिएट और आगे की पढ़ाई के अंकों से मेरिट सूची बनती है, फिर दस्तावेज़ों का सत्यापन होता है। कोई लिखित परीक्षा और आमतौर पर कोई इंटरव्यू नहीं होता। इसीलिए वर्कर के आवेदन में अंकों को सही-सही भरना सबसे ज़्यादा मायने रखता है, क्योंकि छोटी सी गलती भी मेरिट सूची में जगह बदल सकती है।
सुपरवाइजर की भर्ती इससे बिल्कुल अलग है। यह एक प्रतियोगी परीक्षा वाला पद है। UP में यह भर्ती UPSSSC के ज़रिए होती है, जिसमें लिखित परीक्षा और फिर दस्तावेज़ सत्यापन होता है। परीक्षा में आमतौर पर बाल विकास, पोषण, महिला एवं बाल कल्याण योजनाएँ, सामान्य ज्ञान और तर्कशक्ति (reasoning) जैसे विषय पूछे जाते हैं। कुछ राज्यों में मेरिट या इंटरव्यू का तरीका भी हो सकता है, पर UP के संदर्भ में लिखित परीक्षा ही मुख्य रास्ता है।
वेतन का सार: मानदेय कितना, वेतनमान कितना
anganwadi worker aur supervisor mein difference वेतन में भी उतना ही बड़ा है, जितना काम के दायरे में है।
anganwadi worker aur supervisor mein difference समझाते हुए यह लेख वेतन की पूरी तालिका दोबारा नहीं छाप रहा है, क्योंकि वही पूरी जानकारी हमारे तीन अलग लेखों में है। यहाँ सिर्फ सार दिया जा रहा है, ताकि तुलना साफ रहे और आंकड़े आपस में उलझें नहीं।
वर्कर के लिए UP में ताज़ा खबर यह है कि सितंबर 2026 में मानदेय बढ़ाया गया है। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार वर्कर का मानदेय ₹8,000 से बढ़कर ₹12,000 प्रतिमाह हुआ है, और यह बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से लागू होकर अक्टूबर 2026 में भुगतान के रूप में सामने आया है। सहायिका का मानदेय भी उसी घोषणा में ₹4,000 से बढ़कर ₹6,000 हुआ है। ध्यान रहे कि पुराने लेखों में वर्कर के लिए ₹6,500–₹7,000 जैसे आंकड़े भी दिखते हैं — वे बढ़ोतरी से पहले के आंकड़े हैं, इसलिए उन्हें आज का मानदेय समझकर न चलें।
सुपरवाइजर के लिए तस्वीर वेतनमान वाली है। UP से जुड़ी रिपोर्टों में भत्तों सहित लगभग ₹35,000–₹45,000 प्रतिमाह बताया गया है (Pay Level 6 से जोड़कर), जबकि UPSSSC मुख्य सेविका 05/2022 के नोटिफिकेशन में पुराना वेतनमान ₹5,200–₹20,200 और ग्रेड पे ₹2,800 (Pay Level-5) दर्ज था। अलग-अलग समय और स्रोतों के ये आंकड़े एक अंतिम आंकड़े में नहीं जोड़े गए हैं।
पूरी वेतन जानकारी यहाँ देखें: UP आंगनवाड़ी वर्कर सैलरी 2026, आंगनवाड़ी सहायिका सैलरी UP और आंगनवाड़ी सुपरवाइजर सैलरी UP।
पदोन्नति: क्या वर्कर सुपरवाइजर बन सकती हैं
anganwadi worker aur supervisor mein difference को समझने के बाद ही पदोन्नति का रास्ता सही तरीके से समझ आता है।
हाँ, पर यह अपने आप नहीं होता। वर्कर से सुपरवाइजर बनने के दो रास्ते आमतौर पर बताए जाते हैं। पहला रास्ता है सीधी भर्ती — यानी स्नातक पूरा करके सुपरवाइजर की खुली परीक्षा देना, जिसमें कोई भी पात्र स्नातक महिला आवेदन कर सकती है। दूसरा रास्ता है विभागीय परीक्षा या अनुभव कोटा — यानी कुछ वर्षों तक वर्कर के रूप में काम करने के बाद, विभाग की ओर से सुपरवाइजर पद के लिए होने वाली परीक्षा में शामिल होना।
यहाँ सावधानी ज़रूरी है: कुछ लेख 5–10 वर्ष की सेवा की बात करते हैं, तो कुछ 3–5 वर्ष और स्नातक की। ये आंकड़े अलग-अलग राज्यों और समय की भर्तियों से हैं, इसलिए UP के लिए कोई एक निश्चित वर्ष-संख्या अंतिम सच के रूप में नहीं छापी जा रही है — अनुभव कोटे का सटीक प्रतिशत और सेवा-अवधि ताज़ा नोटिफिकेशन से ही तय होगी।
anganwadi worker aur supervisor mein difference के बाद अगला सवाल पदोन्नति का है — सुपरवाइजर बनने के बाद भी रास्ता खत्म नहीं होता। सुपरवाइजर से आगे CDPO, फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) का रास्ता खुलता है — सीढ़ी: सहायिका → वर्कर → सुपरवाइजर → CDPO → DPO। हर कदम पर राज्य के नियम और रिक्तियाँ ही तय करती हैं कि रास्ता कब खुलेगा।
कौन सा पद किसके लिए बेहतर है
anganwadi worker aur supervisor mein difference को अपनी योग्यता और हालात से मिलाकर देखना ही सही चुनाव की कुंजी है।
यह हर महिला के हालात पर निर्भर करता है। अगर आप 12वीं पास हैं, अपने गाँव या वार्ड में ही काम करना चाहती हैं, और बिना लिखित परीक्षा के मेरिट से नौकरी चाहती हैं, तो वर्कर का पद सीधा रास्ता है — काम घर के पास, समुदाय से सीधा जुड़ाव।
अगर आप स्नातक हैं, परीक्षा की तैयारी कर सकती हैं, यात्रा करके कई केंद्रों की देखरेख कर सकती हैं, और नियमित वेतनमान, भत्ते तथा आगे CDPO तक बढ़ने का रास्ता चाहती हैं, तो सुपरवाइजर का पद आपके लिए बेहतर है। इसमें ज़िम्मेदारी ज़्यादा है, पर वेतन, सुरक्षा और करियर की सीढ़ी भी ज़्यादा साफ है।
आम गलतफहमियाँ जो दूर होनी चाहिए
anganwadi worker aur supervisor mein difference के बारे में फैली गलतफहमियाँ अक्सर गलत आवेदन और गलत उम्मीदों की वजह बनती हैं।
पहली गलतफहमी anganwadi worker aur supervisor mein difference को लेकर ही है — यह मान लेना कि दोनों एक ही तरह की नौकरी हैं, बस नाम अलग है। सच यह है कि एक मानदेय वाली कार्यकर्ता है और दूसरी वेतनमान वाली नियमित कर्मचारी है।
दूसरी गलतफहमी यह है कि सुपरवाइजर बनने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है। सच यह है कि स्नातक योग्यता और परीक्षा की शर्तें भी पूरी करनी होती हैं, और UP जैसे राज्यों में विषय की शर्त भी हो सकती है।
तीसरी गलतफहमी यह है कि दूसरे राज्य का वेतन UP में भी लागू होगा। सच यह है कि मानदेय और वेतनमान, दोनों राज्य के अनुसार बदलते हैं। ओडिशा या पश्चिम बंगाल का वेतनमान UP का वेतनमान नहीं है।
चौथी गलतफहमी यह है कि कोई एजेंट या दलाल सुपरवाइजर का पद दिला सकता है। सच यह है कि चयन मेरिट या परीक्षा से होता है, और पैसे माँगने वाला कोई भी व्यक्ति धोखा दे रहा है। आवेदन हमेशा आधिकारिक पोर्टल से ही करें — UP में UPSSSC की वेबसाइट और महिला एवं बाल विकास विभाग के पोर्टल ही सही रास्ता हैं।
आवेदन से पहले की ज़रूरी जाँच-सूची
anganwadi worker aur supervisor mein difference जानने के बाद यह जाँच-सूची आवेदन को खारिज होने से बचा सकती है।
- आप उसी ग्राम सभा या वार्ड की निवासी हैं या नहीं, जहाँ रिक्ति निकली है (वर्कर के लिए)।
- आपकी योग्यता ताज़ा नोटिफिकेशन के अनुसार है या नहीं — वर्कर के लिए इंटरमीडिएट, सुपरवाइजर के लिए स्नातक और विषय की शर्त।
- आपकी आयु सीमा नोटिफिकेशन की कट-ऑफ तारीख के अनुसार सही है या नहीं।
- आपके अंक, निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र (अगर लागू हो) और आय प्रमाणपत्र सही और सत्यापन योग्य हैं या नहीं।
- आपने आवेदन आधिकारिक पोर्टल से ही किया है, किसी एजेंट के ज़रिए नहीं।
- सुपरवाइजर के लिए आपने परीक्षा का पाठ्यक्रम (बाल विकास, पोषण, योजनाएँ, सामान्य ज्ञान, तर्कशक्ति) देख लिया है या नहीं।
दूसरे करियर रास्तों के लिए भी देखें: CTET और UPTET में अंतर, 12वीं के बाद टीचर बनने का सस्ता कोर्स और बिना डिग्री के जॉब कैसे पाएँ।
आधिकारिक स्रोत कहाँ देखें
anganwadi worker aur supervisor mein difference से जुड़ा कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले आधिकारिक स्रोत ही देखें।
भर्तियों के लिए हमेशा आधिकारिक पोर्टल देखें: UP सुपरवाइजर भर्ती के लिए UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट, और सामान्य जानकारी के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का पोर्टल। जिले की वर्कर भर्ती के लिए जिला बाल विकास परियोजना कार्यालय की सूचना ही अंतिम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आंगनवाड़ी वर्कर और सुपरवाइजर में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
सबसे बड़ा अंतर नौकरी की किस्म और दायरे का है। वर्कर एक केंद्र चलाती हैं और मानदेय पाती हैं, जबकि सुपरवाइजर 20–25 केंद्रों की देखरेख करती हैं और नियमित वेतनमान वाली सरकारी कर्मचारी होती हैं। anganwadi worker aur supervisor mein difference की यही एक पंक्ति पूरी तुलना का सार है।
क्या आंगनवाड़ी वर्कर स्थायी सरकारी नौकरी है?
नहीं, वर्कर का पद मानदेय आधारित है, नियमित वेतनमान वाली स्थायी सरकारी नौकरी नहीं है। सुपरवाइजर का पद नियमित सरकारी सेवा वाला है, जिसमें वेतनमान और भत्ते मिलते हैं।
UP में आंगनवाड़ी वर्कर बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
UP की 2026 की जिला भर्तियों के अनुसार इंटरमीडिएट (12वीं) पास होना ज़रूरी है, आवेदिका केवल महिला होनी चाहिए, और उसे उसी ग्राम सभा या वार्ड की निवासी होना चाहिए जहाँ रिक्ति है। आयु सीमा ताज़ा नोटिफिकेशन से ही तय होगी।
सुपरवाइजर बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
सामान्य रूप से स्नातक चाहिए। UPSSSC मुख्य सेविका 05/2022 में UPSSSC PET 2021 में शामिल होना और कला स्नातक में समाजशास्त्र, समाज कार्य, गृह विज्ञान या पोषण एवं बाल विकास में से कोई एक विषय होना ज़रूरी था, और आयु सीमा 21 से 40 वर्ष थी। नया नोटिफिकेशन ज़रूर पढ़ें।
क्या वर्कर बिना परीक्षा के सुपरवाइजर बन सकती हैं?
नहीं, वर्कर से सुपरवाइजर बनना अपने आप नहीं होता। इसके लिए विभागीय परीक्षा या सीधी भर्ती परीक्षा देनी होती है, और स्नातक योग्यता भी पूरी करनी होती है। अनुभव मदद करता है, पर वह परीक्षा और योग्यता की जगह नहीं लेता।
सुपरवाइजर कितने केंद्र देखती हैं और किसको रिपोर्ट करती हैं?
आमतौर पर एक सुपरवाइजर 20–25 आंगनवाड़ी केंद्रों की देखरेख करती हैं। वे अपनी रिपोर्ट CDPO और जिला प्रशासन को भेजती हैं, जबकि वर्कर अपनी रिपोर्ट सुपरवाइजर को देती हैं।
निष्कर्ष: अंतर समझकर सही रास्ता चुनिए
anganwadi worker aur supervisor mein difference को अगर एक वाक्य में समेटना हो, तो वह यह है कि वर्कर एक केंद्र की जान हैं और सुपरवाइजर कई केंद्रों की निगरानी करने वाली अधिकारी हैं। वर्कर का रास्ता मेरिट, स्थानीय निवास और मानदेय से जुड़ा है, जबकि सुपरवाइजर का रास्ता स्नातक, लिखित परीक्षा और वेतनमान से जुड़ा है।
anganwadi worker aur supervisor mein difference के बावजूद दोनों पदों का मकसद एक ही है — बच्चों का पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती शिक्षा, और माताओं की देखभाल। anganwadi worker aur supervisor mein difference सिर्फ इतना है कि आप किस स्तर पर, किस योग्यता से और किस तरह की सेवा शर्तों के साथ इस मकसद से जुड़ना चाहती हैं। अपनी योग्यता, रिक्ति और ताज़ा नोटिफिकेशन को मिलाकर फैसला लें।
